Uttarkashi Tunnel Rescue Operation: उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों का रेस्क्यू ऑपरेशन में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.  जिसके जरिए सुरंग की स्थिति के बारे में जानकारी ली जा रही है. इसके लिए बंगलुरु की स्क्वाड्रन इंफ्रा माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से दो ड्रान मंगाए गए हैं. कंपनी के एमडी सिरिएक जोसेफ ने बताया कि ये नई तकनीक है, जिससे ड्रोन दुर्गम जगहों पर भी भेजा जा सकता है. 


बचाव अभियान में इस्तेमाल की जा रही ड्रोन तकनीक को लेकर स्क्वाड्रन इंफ्रा माइनिंग के एमडी और सीईओ सिरिएक जोसेफ ने बताया, 'ड्रोन टेक्नोलॉजी एक नई तकनीक है, जो सुरंग के अंदर और बाकी दुर्गम जगहों पर भी जा सकता है इस ड्रोन के जरिए लाइव स्ट्रीम भी किया जा सकता है. इसकी मदद से हम पल-पल की नजर बनाए हुए हैं, अगर हल्की हलचल भी हो जाती है तो हमें पता लग जाएगा.' 



बचाव काम में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल
सुरंग में फंसे मजूदरों के रेस्क्यू ऑपरेशन आखिरी चरण में पहुंच गया है. अबतक 46.8 मीटर तक की ड्रिलिंग हो चुकी है, लेकिन ड्रिलिंग में कई बार रुकावट आ रही है, जिसका पता लगाने के लिए इन ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है. ये ड्रोन मलबे के भीतर की पूरी स्कैनिंग कर सटीक जानकारी दे सकते हैं. इन ड्रोन के जरिए ड्रिलिंग में हो रही परेशानियां का पता लगाया जा रहा है. 


मजदूरों के बाहर आने के इंतजार
इससे पहले जब बुधवार को ड्रिलिंग के दौरान लोहे की मोटी सरिया बीच में आ गई थी, उसका पता भी इसी ड्रोन के जरिए लगाया गया था. बाद में इन्हें काटकर रास्ते से हटाया गया था. गुरुवार को एक पल तो ऐसा भी आया जब लगा कि मजदूर कभी भी बाहर आ सकते हैं. हालांकि अभी प्लेटफॉर्म में दरारें आने की वजह से एक बार फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा है. 


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