सिस्टम सुस्त और ईको-सिस्टम पस्त करने वालों की GHANTI BAJAO
आज बात होगी देश में ऊपरी इलाकों में बरस रही आसमानी आफ़त की क्योंकि हर बार मासूनी बारिश पहाड़ों पर दोहरी मार करती है लेकिन क्या इसके लिए प्रकृति को ही ज़िम्मेदार ठहराना सही है? क्यों पहले से ज्यादा बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं... क्यों पहले से ज़्यादा ज़ोर से दहाड़ रहे हैं पहाड़.. कहीं इसके ज़िम्मेदार हम ही तो नहीं? सिस्टम की कोताही को तो कोसा जाना चाहिए, सवाल पूछा जाना चाहिए लेकिन हम खुद पहाड़ों पर जाकर करते क्या हैं? क्या विकास की तस्वीर ही बिगाड़ रही है पहाड़ों की तस्वीर? आज आपको घंटी बजानी है सिस्टम को सुस्त बनाने वालों और ईको-सिस्टम को पस्त करने वालों की.. देखिए ये रिपोर्ट और अपना फोन उठाकर 8422840000 पर मिस्ड कॉल दीजिए।




























