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Delhi में हिंसा के बीच मजहब को पीछे छोड़ भाईचारे की मिसाल देती कहानी देखिए
हिंसा के बीच दिल्ली से आई भाईचारे की कहानी
राजेश नाम के 26 वर्षीय लड़के को दंगाइयों की भीड़ ने पकड़ लिया जिसके लिए डॉक्टर शेरवानी और उनका भांजा मसीहा बन कर पहुंचे.
राजेश दफ्तर से करीबन 6:30 बजे (24 फरवरी) को लौट रहे थे कि तभी रास्ते में उन्हें 500-600 दंगाइयों की भीड़ ने घेर लिया. राजेश बताते है कि मै अकेला उनके टारगेट पर था , मेरा मोबाइल छीन लिया गया,मेरा सर फट गया और ये लोग मुझे भीड़ के सामने से उठा कर ले गए. उस दिन अगर ये मुस्लिम परिवार मुझे नहीं बचाता तो मेरा बचना संभव ही नहीं था.
राजेश नाम के 26 वर्षीय लड़के को दंगाइयों की भीड़ ने पकड़ लिया जिसके लिए डॉक्टर शेरवानी और उनका भांजा मसीहा बन कर पहुंचे.
राजेश दफ्तर से करीबन 6:30 बजे (24 फरवरी) को लौट रहे थे कि तभी रास्ते में उन्हें 500-600 दंगाइयों की भीड़ ने घेर लिया. राजेश बताते है कि मै अकेला उनके टारगेट पर था , मेरा मोबाइल छीन लिया गया,मेरा सर फट गया और ये लोग मुझे भीड़ के सामने से उठा कर ले गए. उस दिन अगर ये मुस्लिम परिवार मुझे नहीं बचाता तो मेरा बचना संभव ही नहीं था.
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राजेश शांडिल्यसंपादक, विश्व संवाद केन्द्र हरियाणा
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