उत्तराखंड में हिमालय की सिल्वन
तलहटी में स्थित नीम करोली बाबा आश्रम या कैंची धाम नाम का एक छोटा सा आश्रम है.


मंदिर के प्रांगण में भरपूर
हरियाली है और आश्रम एक शांत और एकांत रिट्रीट के लिए एकदम सही जगह प्रस्तुत करता है.


साधारण प्रतीत होने वाले तरीकों
से बाबा ने आश्रम में लोगों की भीड़ खींची और अपने जीवनकाल में उन्होंने कई स्थानों का दौरा किया.


महाराजजी के ध्यान की शक्ति से
अभी भी स्पंदित होने वाली जगह में शांति सबसे स्वाभाविक लगती है.


यह आश्रम उन लोगों के लिए है
जो मौन की तलाश करते हुए समय बिताने का विश्वास रखते हैं.


आश्रम की रसोई में साधारण
शाकाहारी भोजन पकाया जाता है और दान स्वीकार किया जाता है.


दिन में दो या तीन बार प्रार्थना
करने के अलावा, कोई निर्धारित अभ्यास नहीं है.


उत्तरांचल राज्य के उत्तरी भाग के
कुमाऊं क्षेत्र में उत्तर रेलवे की नियमित ट्रेनें उपलब्ध हैं.


वहां से कैंची तक पहुंचने के लिए
दो घंटे की बस की सवारी की आवश्यकता होगी.


जो लोग लंबा समय बिताने में
रुचि नहीं रखते हैं वें कैंची की यात्रा के बाद नैनीताल जा सकते हैं,